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dryogeshsharma


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लड़्कियॉ क्यौ जल्दी बूढी हो जाती है?

Posted On: 30 Mar, 2017  
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fgUnq gfjtu vkSj o.kZ O;oLFkk

Posted On: 22 Feb, 2017  
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मॉ

Posted On: 5 Jun, 2016  
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कलम के दलाल

Posted On: 5 Mar, 2016  
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कर्म मे योग का महत्व

Posted On: 31 Dec, 2015  
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social issues में

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मेधा पटकर का नया अवतार : उमा भारती

Posted On: 12 Jul, 2015  
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Junction Forum में

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नई दुनिया….

Posted On: 3 Apr, 2015  
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Hindi Sahitya में

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ज़िंदगी के फसाने

Posted On: 27 Mar, 2015  
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Others में

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–नर हो न निराश करो मन को

Posted On: 25 Mar, 2015  
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कविता में

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KEJRIWAL’S DELHI

Posted On: 27 Feb, 2015  
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Politics पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: advpuneet advpuneet

शर्मा जी अपने देश के नेता कभी भी अपनी नेतागीरी से देश की जनता को कुछ लाभ हो ऐसा कोई कानून कोई प्रस्ताव लाते ही नहीं हैं और अगर जनहित में कोई कानून बन भी गया तो उस पर खासकर नेता लोग अमल करते भी नहीं है ये नेता तो चुनाव दर चुनाव किसी पार्टी या दल से गठबंधन करके सत्ता पर काबिज होकर राज भोगना चाहते हैं अतः चाहे आबादी बढ़े या घटे नेताओं को अपनी सत्ता से मतलब है सिद्धांतों की राजनीती तो आज अपने देश में है ही नहीं जोड़ तोड़ की राजनीती ही कारगर सिद्ध होती दिखाई दे रही है और इसके खिलाफ कोई कानून नहीं बना है न बनेगा . अगर जनसँख्या वृद्धि से अल्पसंख्यक समुदाय का कुछ भला होता है तो यह भी अल्पसंख्यकों के हित में ही होगा बहुसंखयकों की राजनीती अब होती ही कहाँ है कैसे भी देश का प्रधानमंत्री ,राज्य का मुख्य मंत्री या देश का राष्ट्रपति किसी दलित को बना दिया जाए बस इतना कर देने से ही दलितों का तुष्टिकरण हो जाता है ऐसा नेता और वर्तमान सरकारें सोचती और करतीं दिखलायी दे रहीं हैं अब इसमें किसी आम दलित का कितना? लाभ हो रहा है या उनके जीवन में क्या सुधार हो रहा है यह सबको दिखलायी पड़ रहा है . आपको सप्ताह का बेस्ट ब्लागर चुना गया इसके लिए आपको हार्दिक बधाई .

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

श्री शर्मा जी आपको एक ऐसे प्रदेश में छोड़ दिया जाए जिन बातों मैं आपको पाखंड या आडंबर लगता है वहां ऐसा कुछ भी न हो न उत्स्व न शोर न शराबा आपकी जिंदगी दूभर हो जायेगी आपके जीबन में उमंग ही खत्म हो जायेगी न ख़ुशी होगी न यह सोच कर दुःख हाय इतना खर्चा क्यों किया आप करेंगे क्या इन उतस्वों में जरा बच्चों की ख़ुशी देखिये बड़ी - बड़ी मूर्तियों वाले पंडालों को वह कितने आश्चर्य से देखते हैं यहाँ तक की मुस्लिम j मुहर्रम शोक पर्व है उसमें भी कर्बला में पूरा मेला लगता है ताजिये निकलते हैं बूढ़े देखिये कितने खुश हो कर अपने पोते पोतियों को यह सब दिखाने ले जाते हैं | दू निया का कोई ऐसा देश नहीं हैं जहाँ कोई न कोई उत्स्व न मनाया जाता हो यदि आप ब्राजील के कार्निवाल देख लें आपको वह लोग मूर्ख नजर आएंगे परन्तु दुनिया के लोग स्पेशल देखने जाते हैं पैसा खर्च करते हैं यह शोर भी जीवन का एक हिस्सा है | क्षमा करियेगा यदि ज्यादा लिख दिया हो डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

सीटों के इस नये आवंटन से दक्षिण के दल, भारतीय जनता पार्टी तथा गैर आरक्षित वर्गो की राजनीति में पकड़ कम हो जायेगी। क्योंकि इनकी सीट एवं इनके क्षेत्रों में सीटों का घटना तय है। इससे स्पष्ट होता है कि सीटो का जनसंख्या के आधार पर बढवारे का वर्तमान फार्मूला अत्यन्त दोषपूर्ण है तथा यह राष्ट्र एवं समाज के हित में जरा भी नहीं है। राष्ट्र हित में यह होगा कि संविधान में संशोधन करके ऐसी व्यवस्थाओं को ही खत्म कर दिया जाये जिससे कि देश में जातिवादी एवं साम्प्रदायिक ताकतों को शक्ति मिलती हो। अगर ऐसा नहीं होता है तो आने वाले समय में देश एक जातीय गणराज्य बन जायेगा। तथा हम दो और हमारे दो वाले मूर्ख माने जायेंगें। हम दो हमारे दस वाले सम्मानित होगें।

के द्वारा:

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट




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